परिचय

स्कूल इतिहास

स्वामी ओमानन्द सरस्वती (पूर्व नाम आचार्य भगवान्देव जी) द्वारा अपनी पैतृक भूमि मामूरपूर, नरेला दिल्ली-40 में लगभग 250 बीघा दान में दी गई, जिसमें से भूमि का कुछ भाग हरियाणा में भी आता हैं। जिस पर 1954 में विद्यार्य सभा नरेला दिल्ली की स्थापना करके उसके अन्तर्गत 1954 से ही नियमित रूप से गुरूकुल में अध्ययन/अध्यापन प्रारम्भ किया गया।

हमारा उद्देश्य (Our Mission & Vision)

महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा अनुमोदित वैदिक ब्रह्मचर्य प्रणाली एवं भारतीय संस्कृति के आधार पर ब्रह्मचारिणियों को शिक्षित बनाकर समाज व देश के लिए आदर्श नागरिक, विदुषी तथा तन, मन, धन की दृष्टि से स्वावलम्बी, पूर्ण स्वस्थ, चरित्रवान्, गुणवान्, सादा जीवन उच्च विचार की कन्यायें तैयार करना। जातपात का भेदभाव मिटाकर आदर्श समाज का निर्माण करना।

यह संस्थान नरेला-प्याऊ मनियारी रोड, सोनीपत (हरियाणा) में स्थित है, जहाँ का वातावरण शांत, सुरक्षित और अध्ययन के अनुकूल है।

सम्बद्धता (Affiliation)

  • कक्षा छठी से बारहवीं तक – हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी (HBSE)।

  • शास्त्री एवं आर्चाया – महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक (MDU)।

हमारे संस्थापक: स्वामी ओमानन्द सरस्वती

स्वामी ओमानन्द सरस्वती (पूर्व नाम आचार्य भगवान्देव) जी का जन्म 22 मार्च 1911 को नरेला, दिल्ली में हुआ। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद् थे। 23 मार्च 1931 को सरदार भगत सिंह के बलिदान दिवस पर उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य और राष्ट्रसेवा का व्रत लिया। उन्होंने कन्या शिक्षा और समाज सुधार के लिए अपनी पैतृक संपत्ति (लगभग 250 बीघा भूमि) दान करके इस गुरुकुल की स्थापना की। पुरातत्व और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें ‘राष्ट्रीय पंडित’ की उपाधि से सम्मानित किया।